अब होगी आखरी लढाई महाबोधि विहार मुक्ती आंदोलन की
श्री सुनील उत्तमराव साळवे
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मुख्य संपादक
Vansh News Digital Web portal online.
नवी दिल्ली : 6 फरवरी 2025.
बोधिगया मुक्ती आंदोलन के प्रमुख क्रांतिकारी बौध्द भंते विणाचार्य के नेतृत्व मे 12 फरवरी 2025 को होनेवाले ” आखरी लढाई” के भव्य आंदोलन मे शामिल होने का निमंत्रण भंते विणाचार्य के नेतृत्व के शिष्टमंडल ने नेता प्रतिपक्ष सांसद राहुल गांधी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष सांसद मल्लिकार्जुन खडगे, कांग्रेस के मुकुल वासनिक को निमंत्रण दिया गया | शिष्टमंडल मे सांसद शामकुमार बर्वे तथा मिशन महाबोधी महाविहार बुद्धगया कमेटी उपाध्यक्ष प्रकाश गजभिये, सचिव नितीन गजभिये, महासचिव कपिल गोडबोले, कोषाध्यक्ष रत्नदीप रंगारी, राकेश धारगावे (सहसचिव), सलाहगार निरज लोणारे नेहाल पाटील आदी उपस्थित थे | भंते विणाचार्य ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से महाबोधिविहार मुक्ती आंदोलन के विषय पर चर्चा कि चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने अपना पुरा समर्थन इस आंदोलन को दिया। तथा इस विषय को रास्ते से संसद तक उठाने का आश्वासन दिया।




इसके पहले केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री ना.रामदास आठवले, सांसद वर्षाताई गायकवाड, विधाएक डॉ.नितीन राऊत, पुर्व मंत्री सुनील केदार, तथा पुर्व राज्यमंत्री सुलेखाताई कुंभारे एवं कई जानामानी राजनैतिक नेताओ को भी इस धरना प्रदर्शन मे शामिल होने का कमेटी ने न्यौता दिया था।
भंते विनाचार्य बोधगया के ऐतिहासिक महाबोधि मंदिर को ब्राह्मणों/हिंदू प्रबंधन से मुक्त कराकर बौद्धों को सौंपने के लिए चल रहे ‘बोधगया मुक्ति आंदोलन’ के एक प्रमुख क्रांतिकारी भंते और नेतृत्वकर्ता हैं। उन्होंने देश भर में जागरूकता फैलाकर, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के माध्यम से बुद्ध की ज्ञानस्थली पर बौद्धों के अधिकार की मांग को मुखर किया है।वर्तमान मे बोधीगया का संचालन करने बनी कमेटी मे 4 ब्रामण तथा 4 बौद्ध और एक कलैक्टर (ब्राम्हण) आदी 8 लोग ट्रस्टी है। बोधिगया महाविहार मै ब्राम्हण द्वारों चल रहे कर्मकांड और पाखंड को खत्म करने बोधीगया महाविहार को पुरी तरह से बौद्ध समाज के हवाले करने कि मांग को लेकर भंते विणाचार्य के नेतृत्व मे अभी नही तो कभी नहीं वाला भव्य आंदोलन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने जा रहा है।इस आंदोलन से वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कि केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाए। ज्ञात रहे कि अयोध्या के राममंदिर निर्माण का फैसला केवल धार्मिक आस्था और भावनाओं को देखकर सुप्रीम कोर्ट ने दिया था। उसीप्रकार बौद्ध समाज कि धार्मिक श्रद्धा और भावनाओ को नजरअंदाज नही किया जा सकता। बौद्धों कि पुरातन विरासत बौद्धों के हवाले करने कि पुरजोर मांग को लेकर इसके पहले भंते अनागरिक धम्मपाल ने 1881 मे महाबोधी सोसायटी कि स्थापना कि थी। उसके बाद भंते सुरई ससाई और पुर्व राज्यमंत्री अँड. सुलेखाताई कुंभारे ने सुप्रीम कोर्ट मे याचिका दायर कि है।
सदियों से ब्राह्मणवाद के शिकंजे में कैद महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन में 2025 मे भंते विनाचार्य जी के साथ पूरा देश खड़ा हो गया था। भंते विनाचार्य एक प्रमुख बौद्ध भिक्खु है। यह आंदोलन महाबोधि मंदिर अधिनियम, 1949 (BT Act 1949) को रद्द करने और महाविहार का प्रबंधन पूरी तरह से बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग करता है, जिसे वर्तमान में ब्राह्मण और बौद्ध दोनों मिलकर संचालित करते हैं|
भंते विनाचार्य के इस आंदोलन को देशभर के बौद्ध समुदाय का व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिसमें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार और तेलंगाना के लोग सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं| उनका उद्देश्य महाबोधि महाविहार को ब्राह्मण महंत के कब्जे से मुक्त कर बौद्ध भिक्खुओं को सौंपना है, ताकि बौद्ध धर्मावलंबियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा हो सके|


































